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12 फरवरी 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी एंथ्रोपिक ने घोषणा की है कि वह अपने डेटा सेंटर विस्तार से जुड़ी बिजली ग्रिड अपग्रेड की लागत स्वयं वहन करेगी, ताकि आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
तेजी से बढ़ती एआई तकनीक की मांग के कारण दुनिया भर में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। ये सेंटर भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं, जिससे स्थानीय बिजली ढांचे पर दबाव बढ़ने और उपभोक्ताओं के बिल बढ़ने की आशंका पैदा हो रही है।
एंथ्रोपिक ने स्पष्ट किया है कि उसके डेटा सेंटरों को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए जो भी इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड आवश्यक होगा, उसकी पूरी लागत कंपनी स्वयं वहन करेगी। कंपनी अपनी मासिक बिजली भुगतान दर बढ़ाकर इन खर्चों को कवर करेगी, ताकि इसका बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर न डाला जाए।
कंपनी ने कहा कि वह मौजूदा बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहने के बजाय नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ने पर काम करेगी। जहां नई बिजली परियोजनाएं तुरंत उपलब्ध नहीं होंगी, वहां कंपनी स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर संभावित मूल्य वृद्धि के प्रभाव का आकलन कर उसे संतुलित करने का प्रयास करेगी।
भारत में भी एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है। हैदराबाद, मुंबई, चेन्नई और नोएडा जैसे शहर डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं। ऐसे में यदि वैश्विक एआई कंपनियां भारत में बड़े डेटा सेंटर स्थापित करती हैं, तो बिजली खपत और ग्रिड क्षमता बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी भविष्य में ऐसी नीतियों की जरूरत पड़ सकती है, जहां बड़ी टेक कंपनियां अपने डेटा सेंटर के लिए अतिरिक्त बिजली ढांचे की लागत स्वयं वहन करें, ताकि आम नागरिकों के बिजली बिल प्रभावित न हों। साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर और विंड) के उपयोग को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण होगा।
एंथ्रोपिक ने यह भी कहा है कि वह अपने डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत कम करने के लिए शोध और नई तकनीकों में निवेश करेगी। इसमें ग्रिड ऑप्टिमाइजेशन टूल्स और अधिक ऊर्जा-कुशल सर्वर तकनीक शामिल हैं।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और अन्य देशों में टेक कंपनियां एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ा रही हैं। हालांकि, स्थानीय समुदाय बिजली बिल, जल संसाधन और भूमि उपयोग को लेकर चिंतित हैं।
एंथ्रोपिक का यह निर्णय संकेत देता है कि एआई विकास और ऊर्जा स्थिरता के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों में टेक उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों रहेगा।