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A vibrant green forest stretches under a clear blue sky, depicting a summer landscape.

जैव विविधता: स्वस्थ पर्यावरण की रीढ़, आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण ज़रूरी

जैव विविधता यानी पृथ्वी पर मौजूद जीव-जंतुओं, पौधों और सूक्ष्म जीवों की विविधता, एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण की सबसे मज़बूत आधारशिला है। यही जैव विविधता हमें भोजन, स्वच्छ जल, औषधियाँ और जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध कराती है। जंगल, नदियाँ, समुद्र और पर्वतीय क्षेत्र—सभी पारिस्थितिक तंत्र जैव विविधता के सहारे ही संतुलन बनाए रखते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट होते रहे और संकटग्रस्त प्रजातियों को संरक्षित नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, शहरीकरण और प्रदूषण के कारण कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता जा रहा है।

जैव विविधता का संरक्षण न केवल पर्यावरण को मज़बूत बनाता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता भी बढ़ाता है। विविध प्रजातियों से भरे पारिस्थितिक तंत्र अधिक लचीले और टिकाऊ होते हैं, जो सूखा, बाढ़ और बीमारियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं। इसके साथ ही, जैव विविधता पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक दवाओं के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है।

सरकारें और पर्यावरण संगठन वन्यजीव संरक्षण, अभयारण्यों की स्थापना और पर्यावरणीय कानूनों के ज़रिये जैव विविधता को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आम नागरिक जागरूक नहीं होंगे और प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक संरक्षण के प्रयास अधूरे रहेंगे।

पर्यावरणविदों का साफ़ कहना है कि जैव विविधता की रक्षा करना केवल वन्यजीवों को बचाने का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानव अस्तित्व से जुड़ा प्रश्न है। आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेंगे। इसलिए ज़रूरी है कि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलें और जैव विविधता के संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाएं।

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