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जैव विविधता एक स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण की रीढ़ मानी जाती है, जो मानव जीवन के लिए भोजन, स्वच्छ जल और औषधियों जैसे आवश्यक संसाधन प्रदान करती है। पृथ्वी पर मौजूद वनस्पतियाँ, जीव-जंतु और सूक्ष्म जीव मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखते हैं, जिससे जीवन का चक्र सुचारु रूप से चलता रहता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना और विलुप्तप्राय प्रजातियों का संरक्षण करना बेहद ज़रूरी है। बढ़ता शहरीकरण, वनों की कटाई और प्रदूषण के कारण कई प्रजातियाँ संकट में हैं, जिसका सीधा असर पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ रहा है। यदि समय रहते संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी परिणाम मानव जीवन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
जैव विविधता से समृद्ध पारिस्थितिक तंत्र अधिक मज़बूत और लचीले होते हैं, जो जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं का बेहतर सामना कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और टिकाऊ पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए जैव विविधता का संरक्षण आज की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है।
सरकार और पर्यावरण संगठन संरक्षण की दिशा में प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आम नागरिकों की सहभागिता के बिना यह लक्ष्य अधूरा है। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही मानव और पर्यावरण दोनों के भविष्य को सुरक्षित रख सकता है।