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अमेरिका के साथ प्रस्तावित टैरिफ समझौते को लेकर संसद में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह समझौता देशहित से समझौता है और इससे घरेलू उद्योगों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। संसद में दिए गए बयान में कहा गया कि सरकार ने अमेरिका को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं।
विपक्ष का कहना है कि यह समझौता ‘डील’ से ज्यादा ‘ढील’ जैसा है, जिसमें भारत के हितों की पूरी तरह रक्षा नहीं की गई। खासतौर पर कृषि, डेयरी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लेकर चिंता जताई गई है। उनका आरोप है कि विदेशी उत्पादों पर शुल्क कम होने से भारतीय बाजार प्रभावित हो सकता है।
वहीं सरकार की ओर से सफाई दी गई है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की भागीदारी को मजबूत करने के लिए ऐसे समझौते जरूरी हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में मदद करेगा। फिलहाल यह मुद्दा संसद में चर्चा और बहस का केंद्र बना हुआ है।