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इस्लामाबाद। पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय शांति का दूत बताने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आज इस्लामाबाद में शुरू हो गई है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है।पीएम शहबाज शरीफ ने आज सुबह ईरानी डेलिगेशन से मुलाकात की, फिर अमेरिकी डेलिगेशन से भी बात की। उनके साथ डिप्टी पीएम इशाक दार, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और इंटीरियर मिनिस्टर मोहसिन नकवी भी मौजूद थे।पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वो क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए मध्यस्थता की भूमिका निभाएगा। लेकिन दोनों तरफ से शर्तें इतनी सख्त हैं कि सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा।ईरान की सख्त शर्तें:
ईरान के उप-राष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने साफ चेतावनी दी कि अगर बातचीत “America First” के आधार पर हुई तो समझौता हो सकता है, लेकिन अगर “Israel First” नीति हावी रही तो कोई डील नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अगर वार्ता फेल हुई तो पूरी दुनिया को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।एक ईरानी सूत्र का दावा है कि अमेरिका ने दबाव में ईरान के फ्रोजन एसेट्स छोड़ने पर हामी भर दी है, लेकिन अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच आपसी अविश्वास अभी भी सबसे बड़ी दीवार बना हुआ है।पाकिस्तान की हालत:पाकिस्तान इस वार्ता को अपना डिप्लोमेटिक मास्टरस्ट्रोक बता रहा है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और है। इजराइल अभी भी हिजबुल्लाह के साथ सीजफायर की बात करने से इनकार कर रहा है। क्षेत्र में तनाव पूरी तरह कम नहीं हुआ है।अगले 48 घंटे बहुत अहम बताए जा रहे हैं। इसी दौरान तय होगा कि ये वार्ता शांति की तरफ बढ़ेगी या फिर और तनाव बढ़ेगा।सम्वाद मीडिया न्यूज़ की राय: पाकिस्तान शांति का मध्यस्थ बनने का दावा तो कर रहा है, लेकिन उसके अपने घरेलू और आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि वो खुद को स्थिर रखने में मुश्किल महसूस कर रहा है। अमेरिका-ईरान जैसे बड़े खिलाड़ियों के बीच मध्यस्थता करना पाकिस्तान के बस की बात नहीं लगती। वो बस अंतरराष्ट्रीय पटल पर कुछ रोल दिखाने की कोशिश कर रहा है।