‘रिटायरमेंट के 20 साल बाद तक किताब लिखने पर कोई रोक नहीं’, जनरल नरवणे की पुस्तक विवाद पर बोले राजनाथ सिंह

पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा को लेकर चल रहे विवाद पर पहली बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि सेना से जुड़े अधिकारियों को रिटायरमेंट के 20 साल बाद तक कोई भी किताब लिखने की अनुमति नहीं होगी।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पूर्व सेना प्रमुखों या सैन्य अधिकारियों की किताब लिखने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं।

संसद में उठा था जनरल नरवणे की किताब का मुद्दा

हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की पुस्तक को प्रकाशित करने की अनुमति को लेकर सरकार से सवाल किया था। इसके बाद दोनों सदनों में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।

गलवान झड़प के समय सेना प्रमुख थे जनरल नरवणे

जनरल एमएम नरवणे मार्च 2020 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे। इसी दौरान वर्ष 2020 में चीन के साथ गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प और सीमा विवाद सामने आया था।

अक्टूबर 2023 में जनरल नरवणे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपनी आत्मकथा Four Stars of Destiny लिखी है, जिसके कुछ अंश समाचार एजेंसी पीटीआई द्वारा प्रकाशित भी किए गए थे।

किताब में क्या-क्या किया गया है उल्लेख

इस पुस्तक में गलवान घाटी की घटना, चीन के साथ हुए डिसइंगेजमेंट समझौते और सीमा विवाद से जुड़े अहम घटनाक्रमों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसके साथ ही जनरल नरवणे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल के साथ हुई बैठकों और फोन पर बातचीत का भी जिक्र किया है।

किताब में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और चाइना स्टडी ग्रुप (CSG) की बैठकों से जुड़े विवरण भी शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय ने पब्लिशर से मांगा पूरा ड्राफ्ट

सूत्रों के मुताबिक, पुस्तक में सैन्य रणनीति, कमांडरों को दिए गए निर्देश और संवेदनशील बातचीत का उल्लेख होने के कारण रक्षा मंत्रालय ने सीधे लेखक के बजाय किताब प्रकाशित करने वाले पब्लिशिंग हाउस से पूरा ड्राफ्ट तलब किया है।

बताया जा रहा है कि पुस्तक को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और आर्मी एक्ट के प्रावधानों के तहत रोका गया है। यह किताब अप्रैल 2024 में प्रकाशित होनी थी, लेकिन अब तक इसे अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।

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