Supreme Court of India का बड़ा फैसला: आत्महत्या के लिए उकसाने पर जीवनसाथी भी होगा आपराधिक रूप से जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट ने आत्महत्या से जुड़े मामलों में एक अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने में उसका जीवनसाथी (पति या पत्नी) शामिल पाया जाता है, तो उसे भी आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मानसिक उत्पीड़न, लगातार प्रताड़ना या ऐसा कोई व्यवहार, जो किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दे, उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष कार्रवाई ही नहीं, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य और व्यवहारिक दबाव भी अपराध की श्रेणी में आएंगे।

इस फैसले को घरेलू विवादों और आत्महत्या से जुड़े मामलों में एक बड़ा कानूनी संदेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी और मानसिक उत्पीड़न के मामलों में जवाबदेही तय होगी।

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