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भारत के महानगरों में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालिया आकलनों के अनुसार, शहरी आबादी में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन, देर रात तक जागना और मानसिक तनाव इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। निजी अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक, हार्ट अटैक के मामलों में युवाओं की हिस्सेदारी पहले के मुकाबले बढ़ी है।
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बड़े खतरे को टाल सकते हैं। रोजाना 30 से 45 मिनट की वॉक, नमक और चीनी का सीमित सेवन, धूम्रपान से दूरी और नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी हैं। सरकार भी निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में जागरूकता कार्यक्रम चलाने की तैयारी कर रही है।