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बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले मर्चेंट नेवी कैप्टन राकेश रंजन की मौत की खबर से पूरे परिवार और इलाके में शोक की लहर है। वह मध्य पूर्व के संवेदनशील क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने जहाज पर फंसे हुए थे, जहां चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच उनकी जान चली गई।
जानकारी के मुताबिक, कैप्टन राकेश रंजन तेल टैंकर जहाज ‘अवाना’ पर तैनात थे, जो बीते कई दिनों से समुद्र में फंसा हुआ था। इसी दौरान 18 मार्च को उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा। जहाज पर समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई और आखिरकार उनकी मृत्यु हो गई।
परिवार का कहना है कि अगर हालात सामान्य होते और समय पर इलाज मिल जाता, तो उनकी जान बच सकती थी। कैप्टन के बड़े भाई ने दुख जताते हुए कहा कि यदि युद्ध एक दिन बाद शुरू होता, तो शायद राकेश आज जिंदा होते।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते एयर एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो सकी, जिससे उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका। बाद में उन्हें दुबई ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
वर्तमान में उनका पार्थिव शरीर दुबई के अस्पताल में रखा गया है और परिवार सरकार से जल्द से जल्द उसे भारत लाने की मांग कर रहा है। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि वह घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे।
कैप्टन राकेश रंजन मूल रूप से बिहारशरीफ (नालंदा) के निवासी थे, जबकि उनका परिवार लंबे समय से रांची में रह रहा है। अब उनके पार्थिव शरीर को भारत लाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी की जा रही है।