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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल तकनीक का सफल परीक्षण किया है, जिससे भविष्य में एक ही रॉकेट का कई बार उपयोग संभव होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरिक्ष मिशनों की सबसे बड़ी लागत रॉकेट निर्माण और लॉन्चिंग में आती है। यदि रॉकेट दोबारा उपयोग किए जा सकें तो लागत में भारी कमी आएगी। इससे भारत छोटे और मध्यम आकार के सैटेलाइट लॉन्च के वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनेगा।
वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक अभी परीक्षण चरण में है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसका व्यावसायिक उपयोग शुरू हो सकता है। इसके साथ ही भारत चंद्र मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम को भी आगे बढ़ा रहा है।