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शांत दिखने वाले Bacheli के कोआ पारा इलाके में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नाले के किनारे कथित तौर पर केमिकल युक्त लाल मिट्टी डंप की जा रही है—और आशंका है कि बारिश आते ही यही ज़हर पानी के साथ बहकर खेतों और गांवों तक पहुंच सकता है।
यह सिर्फ मिट्टी नहीं… बल्कि आने वाले खतरे की कहानी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि Kirandul स्थित ArcelorMittal Nippon Steel से निकलने वाली केमिकल युक्त लाल मिट्टी को ट्रकों के जरिए बचेली के कोआ पारा इलाके में लाकर नाले के किनारे डंप किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस जगह पर यह डंपिंग हो रही है, वहां पहले जलस्रोत—तालाब मौजूद थे। आरोप है कि उन्हें पाटकर अब इस “लाल ज़हर” का अड्डा बना दिया गया है।
स्थानीय लोगों का डर साफ है—
👉 जैसे ही बारिश शुरू होगी, यह लाल मिट्टी कटकर नाले में जाएगी
👉 और फिर वही पानी खेतों तक पहुंचेगा
👉 जिससे उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर हो सकती है
यानी आज जो सिर्फ डंपिंग दिख रही है…
वो कल खेती और स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती
सबसे बड़ा सवाल:
आखिर ये सब किसके संरक्षण में हो रहा है?
लोग खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि यह पूरा खेल प्रभावशाली लोगों और सत्ता से जुड़े लोगों की मिलीभगत से चल रहा है। जिस तरह से खुलेआम यह काम जारी है, उसने प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
👉 क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं?
👉 या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
ग्राउंड से आवाज़:
स्थानीय लोगों का कहना है—
“हमारी ज़मीन, हमारा पानी और हमारी सेहत दांव पर लगाई जा रही है… और कोई सुनने वाला नहीं।”
बचेली की यह कहानी सिर्फ एक इलाके की नहीं…
बल्कि उस सवाल की है—
क्या विकास की कीमत अब ज़हर बनकर गांवों में उतरेगी?