1
1
उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। कई शहरों में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत ने एक ऐसा दिन भी देखा है जब गर्मी ने मानो प्रलय जैसा रूप ले लिया था?
19 मई 2016…
राजस्थान के फलोदी में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। यह भारत के इतिहास का सबसे ज्यादा दर्ज तापमान माना जाता है। उस दिन हालात इतने भयावह थे कि सड़कें तवे की तरह तप रही थीं और लोगों की चप्पलें तक पिघलकर सड़क पर चिपकने लगी थीं।
फलोदी में हालात ऐसे थे कि हजारों लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। सूरज की तपिश सीधे शरीर को झुलसा रही थी। मजदूरों ने काम पर जाना बंद कर दिया था, क्योंकि खुले आसमान के नीचे कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया था।
इस गर्मी का असर सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं था। बिहार में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी थीं। हालात इतने खराब हो गए थे कि आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों को सुबह 9 बजे के बाद और शाम 6 बजे से पहले खाना न बनाने तक की सलाह दी थी।
2016 की इस भीषण हीटवेव ने पूरे देश में तबाही मचा दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 33 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए थे। कई राज्यों में पानी का संकट गहरा गया था, फसलें सूखने लगी थीं और हजारों लोग लू की चपेट में आए। आधिकारिक आंकड़ों में 1100 से ज्यादा मौतें दर्ज की गई थीं, जबकि कई विशेषज्ञ मानते हैं कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
दिल्ली में तापमान 47 डिग्री तक पहुंच गया था। जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, चूरू और बाड़मेर जैसे शहर आग की भट्ठी बन चुके थे। गुजरात के वलसाड में सड़क इतनी गर्म हो गई थी कि लोगों की चप्पलें सड़क पर चिपक रही थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भारत में हीटवेव पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही हैं। 2016 की गर्मी को आज भी देश की सबसे भयावह गर्मी में गिना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में ऐसे हालात और ज्यादा आम हो सकते हैं।