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जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जंतर-मंतर पर शक्ति प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को सोशल मीडिया से निकला एक अनोखा आंदोलन सड़कों पर दिखाई दिया। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में हजारों छात्र और युवा प्रदर्शन के लिए जुटे। आंदोलन का मुख्य मुद्दा NEET, CBSE, CUET और अन्य भर्ती व परीक्षा विवादों को लेकर जवाबदेही तय करना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रहा।

यह प्रदर्शन पिछले कुछ सप्ताह से सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहे CJP आंदोलन का पहला बड़ा जमीनी प्रदर्शन माना जा रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि लाखों छात्र परीक्षा अनियमितताओं, पेपर लीक और मूल्यांकन संबंधी समस्याओं से प्रभावित हुए हैं।

कौन हैं अभिजीत दीपके?

महाराष्ट्र से आने वाले अभिजीत दीपके हाल ही में अमेरिका से भारत लौटे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि उनका आंदोलन युवाओं की आवाज उठाने के लिए है। दीपके ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं के बावजूद जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?

प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने NEET, CBSE और CUET से जुड़े विवादों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

शांतिपूर्ण रहा प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग की गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और आयोजकों ने भी समर्थकों से अनुशासन बनाए रखने की अपील की थी।

सोशल मीडिया से सड़क तक पहुंचा आंदोलन

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत सोशल मीडिया अभियान के रूप में हुई थी, लेकिन कुछ ही दिनों में इसने बड़ी संख्या में युवाओं का समर्थन हासिल कर लिया। आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाखों फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं और अब यह ऑनलाइन अभियान से आगे बढ़कर जमीनी आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।

आगे क्या?

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके ने संकेत दिए कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को देशभर में विस्तार दिया जा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह छात्र आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी बहसों को और तेज कर सकता है

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