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विमुक्ति जाति दिवस पर सीसीएसयू के नेताजी सुभाषचंद्र बोस प्रेक्षागृह में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन

अंग्रेजों के काले कानून ने जिस घुमंतू समाज की पहचान पर कलंक लगाया था, योगी सरकार उसी समाज के गौरव को सम्मान और अधिकार की पहचान दे रही है। 80 सालों से हर सरकार में उपेक्षित घुमंतू समाज के लोगों को तिरपाल से निकालकर पक्के मकान देने का काम अब प्रदेश सरकार कर रही है। सोमवार को यह बातें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ऑडिटोरियम में विमुक्ति जाति दिवस समारोह पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में मेरठ के प्रभारी मंत्री और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहीं। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में बेहतरीन उपलब्धि हासिल करने वाले घुमंतू समाज के मेधावियों को सम्मानित भी किया। इस अवसर पर मा0 प्रभारी मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियो ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया तथा एक-एक स्टॉल का निरीक्षण किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि असीम अरुण और अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती और गुरु गोरखनाथ के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। इसके बाद वंदेमातरम का गायन हुआ। घुमंतू समाज गाजियाबाद के जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने असीम अरुण का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने भारत माता और गुरू गोरखनाथ के उद्घोष के साथ अपना संबंोधन प्रारंभ करते हुए कहा कि घुमंतू समाज ने पीढ़ियों से देश की लोककला, हस्तशिल्प, परंपराओं और संस्कृति को जीवित रखने का काम किया है। इस समाज के योगदान को इतिहास में वह स्थान नहीं मिला, जिसका वह हकदार था। अब आवश्यकता है कि उनके गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि घुमंतू विकास मिशन शुरू कर समाज को मूलभूत सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार घुमंतू समाज को जाति और आय प्रमाण पत्र के साथ ही आधार कार्ड और वोटर कार्ड भी प्रदान कर रही है। जल्द ही इस समाज के हर परिवार को खेती करने के लिए पट्टे पर जमीन और पक्के मकान दिए जाएंगे। उन्होंने मुगलों के अत्याचार से लेकर गुरिल्ला युद्व और ब्रिटिश शासन के क्रिमिनल ट्राइबल एक्ट तक की घटनाओं पर अपने विचार रखे। प्रभारी मंत्री असीम अरूण ने कहा कि पीडीए की बात करने वाले अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पता भी नहीं होगा कि आज विमुक्त जाति दिवस है, उनके सोशल मीडिया पर इस सम्बन्ध में कोई पोस्ट ही नहीं की है। इससे पता चलता है कि विमुक्ति जातियां उनके एजेंडे में शामिल नहीं हैं।

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