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ईरान का 14 प्वाइंट शांति प्लान, फिर भी नहीं माने ट्रंप — परमाणु और Hormuz मुद्दे पर अड़ा अमेरिका

मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को 14 प्वाइंट का शांति प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके बावजूद मामला सुलझता नजर नहीं आ रहा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव को लेकर सख्त रुख बनाए रखा है और साफ कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि यह डील स्वीकार की जा सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान का यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है, जिसमें युद्ध खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी गई हैं। इसमें अमेरिका से सैन्य बल हटाने, आर्थिक प्रतिबंध खत्म करने, फंसी हुई संपत्तियों को वापस करने और भविष्य में हमले न करने की गारंटी जैसी मांगें शामिल हैं।

इस प्लान में सबसे बड़ा मुद्दा Strait of Hormuz का है, जो दुनिया के करीब 20% तेल सप्लाई के लिए अहम रास्ता माना जाता है। ईरान चाहता है कि इस क्षेत्र में नई व्यवस्था बनाई जाए और अमेरिका अपनी नाकाबंदी खत्म करे, जबकि अमेरिका पहले इस रास्ते को पूरी तरह खोलने और नियंत्रण छोड़ने की शर्त रख रहा है।

इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम भी दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन (enrichment) के अधिकार को बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहा है। यही वजह है कि बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

हालांकि ईरान ने इस प्लान में 30 दिनों के अंदर सभी मुद्दों को सुलझाने की बात कही है, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान ने अभी “काफी बड़ी कीमत नहीं चुकाई” है, इसलिए वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं।

क्यों फंसी है डील?

  • परमाणु हथियार कार्यक्रम पर मतभेद
  • Hormuz जलडमरूमध्य की नाकाबंदी
  • आर्थिक प्रतिबंध हटाने की मांग
  • युद्ध मुआवजा और सुरक्षा गारंटी

निष्कर्ष

ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीद अभी भी बनी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद इस डील को रोक रहे हैं। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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