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पाँच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहीं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल के चुनाव को लेकर रही। इस बार के चुनाव में सियासी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आए। लंबे समय से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ भाजपा की तेज आंधी के सामने कमजोर पड़ता दिखा। चुनावी नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेतित किया है।

भाजपा ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी के कई बड़े नेताओं ने राज्य में लगातार प्रचार किया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश से एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज भी पिछले करीब चार महीनों से पश्चिम बंगाल में डेरा डाले हुए थे। उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का काम किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस रणनीति ने पार्टी को बड़ा फायदा पहुंचाया। पश्चिम बंगाल में मिली सफलता के बाद धर्मेंद्र भारद्वाज की पार्टी हाईकमान में पकड़ और मजबूत हुई है। आने वाले समय में उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि देश की राजनीति में बदलाव की बयार चल रही है और भाजपा लगातार अपने विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है।