1
1
अमेरिका-ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) पेट्रोल और डीजल बेचने में रोजाना करीब ₹1700 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं। इसी वजह से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की आशंका तेज हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों को पिछले 10 हफ्तों में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का अंडर-रिकवरी नुकसान हुआ है। कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम दर पर पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं ताकि आम जनता पर तुरंत बोझ न पड़े।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की सप्लाई और शिपिंग लागत दोनों प्रभावित हुई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ने से तेल टैंकरों का बीमा और फ्रेट कॉस्ट काफी महंगा हो गया है। इसी वजह से भारत को तेल आयात करने में ज्यादा खर्च उठाना पड़ रहा है।
सूत्रों के मुताबिक अगर यही स्थिति बनी रही तो सरकार और तेल कंपनियों को जल्द ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
सरकार के सामने अब दो विकल्प बताए जा रहे हैं—या तो एक्साइज ड्यूटी घटाकर कंपनियों को राहत दी जाए, या फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाएं। हालांकि टैक्स घटाने से सरकार के राजस्व पर असर पड़ेगा।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कुछ दिनों पहले ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया था, लेकिन हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं।