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भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में कथित घुसपैठियों को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों – भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बांग्लादेश की बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) – के बीच कई स्थानों पर विवाद की स्थिति सामने आई है।
बांग्लादेश ने आरोप लगाया है कि भारतीय सीमा से कुछ लोगों को उसकी सीमा में भेजने की कोशिश की गई, जिसे BGB ने रोक दिया। वहीं भारत की ओर से अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की कवायद जारी है।
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में सीमा के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां कथित तौर पर लोगों को बांग्लादेश की ओर भेजने का प्रयास किया गया। BGB ने दावा किया कि उसने इन प्रयासों को विफल कर दिया और सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, भारत में अवैध घुसपैठ और सीमा पार अपराध लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। हाल ही में BSF द्वारा कई बांग्लादेशी नागरिकों को सत्यापन प्रक्रिया के बाद वापस भेजे जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
तनाव के बीच केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। सीमा पर बाड़बंदी (फेंसिंग) के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा रही है और BSF को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने भी हाल ही में सीमा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है।
सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में BSF और BGB के महानिदेशक स्तर की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में घुसपैठ, सीमा सुरक्षा, फेंसिंग, सीमा पार अपराध और अवैध प्रवास जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है क्योंकि इससे मौजूदा तनाव कम करने की कोशिश की जाएगी।
भारत और बांग्लादेश के बीच 4,000 किलोमीटर से अधिक लंबी सीमा है, जिसके कई हिस्से नदी और कठिन भूभाग से गुजरते हैं। ऐसे में अवैध घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराध दोनों देशों के लिए लगातार चुनौती बने रहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में BSF-BGB वार्ता के नतीजे सीमा पर हालात को सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।