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नई दिल्ली। वैश्विक थिंक टैंक Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार शांतिकाल (Peacetime) में 12 परमाणु वारहेड तैनात किए हैं। यदि यह आकलन सही साबित होता है तो यह भारत की परमाणु रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक भारत आमतौर पर अपने परमाणु वारहेड और उन्हें ले जाने वाले प्लेटफॉर्म (मिसाइल आदि) को अलग-अलग रखता था। लेकिन हालिया आकलन में कम से कम 12 वारहेड तैनात स्थिति में बताए गए हैं, जो भारत की रणनीतिक तैयारियों में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
SIPRI की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत के कुल परमाणु हथियारों की संख्या बढ़कर लगभग 190 हो गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 180 बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार भारत लगातार अपनी परमाणु क्षमता का आधुनिकीकरण कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की रणनीतिक तैयारियों में हो रहे बदलाव के पीछे क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां प्रमुख कारण हो सकती हैं। SIPRI के अनुसार भारत का ध्यान विशेष रूप से चीन की बढ़ती सैन्य और परमाणु क्षमताओं पर केंद्रित है। साथ ही भारत-पाकिस्तान के बीच रणनीतिक संतुलन भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह दावा जरूर किया गया है, लेकिन भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भारत की घोषित परमाणु नीति अब भी “विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता” (Credible Minimum Deterrence) और “पहले उपयोग न करने” (No First Use) के सिद्धांत पर आधारित है। SIPRI का आकलन उपलब्ध सूचनाओं और विशेषज्ञ विश्लेषणों पर आधारित माना जाता है।
SIPRI ने अपनी वर्ष 2026 की रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि दुनिया एक नए परमाणु प्रतिस्पर्धा दौर में प्रवेश कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक कई परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं और तैनाती बढ़ा रहे हैं, जिससे वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां और जटिल हो सकती हैं।