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हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच एक सवाल खूब उठ रहा है — क्या **ईरान के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो सीधे अमेरिका तक हमला कर सकती हैं? यह बहस तब तेज हो गई जब ईरानी बलों ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
हालांकि वास्तविक स्थिति यह है कि ईरान के मौजूदा बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम में ऐसी कोई इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) नहीं है जो सीधे अमेरिका तक मार कर सके। ईरान के पास उपलब्ध मिसाइलों की अधिकतम रेंज लगभग 2,000–2,500 किलोमीटर तक है, जो कि अमेरिका की धरती तक पहुँचने के लिए पर्याप्त नहीं है। वहीं ईरान से अमेरिका की दूरी करीब 12,000 किलोमीटर है, इसलिए वर्तमान मिसाइल प्रणाली अमेरिका तक सीधा हमला करने में सक्षम नहीं मानी जाती।
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के मिसाइल समूह में कई तरह की मिसाइलें हैं जिनकी रेंज इजराइल, यूरोप और कुछ मध्य पूर्वी इलाकों तक पहुँच सकती है, लेकिन अमेरिका या उसकी मुख्य भूमि तक पहुंचना फिलहाल संभव नहीं है। उदाहरण के तौर पर:
🔹 फतह हाइपरसोनिक मिसाइल – लगभग 1,400 किमी तक की मारक क्षमता
🔹 शहाब-3 (Shahab-3) – 1,000-2,000 किमी तक
🔹 सेज्जिल (Sejjil) – 2,000-2,500 किमी तक
🔹 पावेह (Paveh) – ~1,650 किमी
🔹 अन्य छोटी दूरी की मिसाइलें जैसे फतह-110, फतह-313 आदि भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन मिसाइलों की रेंज खाड़ी देश, मध्य पूर्व और यूरोप जैसे इलाकों तक मौजूद अमेरिकी बेसों या काफ़िले तक पहुँचने के लिए पर्याप्त हो सकती है, लेकिन अमेरिका के घर तक सीधा हमला करना संभव नहीं है। इंटरकांटिनेंटल मिसाइल विकसित करना एक लंबी तकनीकी प्रक्रिया है और इससे जुड़ी चुनौतियों में उन्नत इंजन, नेविगेशन तकनीक और युद्ध बर्ड (warhead) का छोटे पैमाने पर संयोजन शामिल है।
अगर ईरान भविष्य में ICBM-प्रकार की मिसाइल विकसित करना चाहे, तो उसे वर्षों की शोध-विकास और परीक्षण की आवश्यकता होगी — और बहुत से रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि यह 2030 के लगभग बाद तक भी संभव नहीं होगा, अगर यह प्रोग्राम चुना गया तो भी।