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देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार तीसरी बार बढ़ोतरी के बाद आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। पिछले 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं।
तेल कंपनियों ने 15 मई, 19 मई और 23 मई को लगातार तीन बार ईंधन की कीमतों में इजाफा किया। पहले 3 रुपये प्रति लीटर, फिर करीब 90 पैसे और उसके बाद तीसरी बार पेट्रोल में 87 पैसे तथा डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसी वजह से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बढ़ोतरी कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल कंपनियां अब भी प्रतिदिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
साल 2022 की तरह हालात बनने की आशंका भी जताई जा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी तेल कंपनियों ने लगातार कई चरणों में पेट्रोल-डीजल महंगा किया था। इस बार भी धीरे-धीरे कीमतें बढ़ाकर घाटा कम करने की रणनीति अपनाई जा रही है।
बीपीसीएल के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अगर वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही, तो आगे और दाम बढ़ाना “अनिवार्य” हो सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों को राहत देने के लिए वर्ष 2022 में अपनाए गए फार्मूले की तरह चरणबद्ध तरीके से कीमतों में वृद्धि की जा सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर परिवहन, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी पड़ सकता है, जिससे आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई और बढ़ने की आशंका है।