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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में राजनीतिक सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूर है। इसी बीच सरकार गठन को लेकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की भूमिका पर संवैधानिक बहस शुरू हो गई है।
टीवीके प्रमुख विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TVK ने 108 सीटें जीती हैं और कांग्रेस के समर्थन के बाद संख्या 113 तक पहुंची है, जबकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है।
हालांकि राज्यपाल अभी तक विजय के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार बनाने से पहले पर्याप्त समर्थन का स्पष्ट सबूत जरूरी है।
संवैधानिक विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका देना चाहिए और बहुमत परीक्षण विधानसभा में कराया जाना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्यपाल का पहला कर्तव्य स्थिर सरकार सुनिश्चित करना है। अगर किसी दल के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है तो राज्यपाल समर्थन पत्र मांग सकते हैं।
कांग्रेस ने भी राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि विजय को सरकार गठन का मौका देने में जानबूझकर देरी की जा रही है। कांग्रेस का कहना है कि बहुमत साबित करने की असली जगह विधानसभा होती है, राजभवन नहीं।
अगर कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाता और सरकार गठन में ज्यादा देरी होती है, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना भी जताई जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक अगर संवैधानिक प्रक्रिया लंबे समय तक अटकती है तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है।
चुनाव परिणाम आने के बाद राज्य में जोड़तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। कई दलों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं। राजनीतिक गलियारों में “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” की भी चर्चा शुरू हो गई है।