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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एक उच्चस्तरीय इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप (IMG) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh करेंगे।
इस समूह का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर नजर रखना और उसके भारत पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करना है। खासतौर पर ऊर्जा आपूर्ति, तेल-गैस की उपलब्धता, व्यापार और आर्थिक स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर फोकस रहेगा।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। भारत, जो बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है, इस संकट से सीधे प्रभावित हो सकता है।
इस इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप में कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे, जो मिलकर हालात की लगातार समीक्षा करेंगे और जरूरत पड़ने पर त्वरित फैसले लेंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में ईंधन, जरूरी वस्तुओं और सप्लाई चेन पर कोई बड़ा असर न पड़े।
सरकार पहले ही इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए कई कदम उठा चुकी है, जैसे ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती और सप्लाई चेन को मजबूत करने के प्रयास।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की “प्रोएक्टिव रणनीति” का हिस्सा है, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर असर को कम किया जा सके।