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आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल 2026 को पार्टी से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का बड़ा फैसला लिया। यह कदम भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि चड्ढा AAP के प्रमुख और भरोसेमंद चेहरों में गिने जाते थे।
सबसे अहम बात यह रही कि चड्ढा अकेले नहीं गए, बल्कि उनके साथ AAP के करीब दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, AAP के राज्यसभा में कुल लगभग 10 सांसद थे, जिनमें से करीब 7 सांसदों ने BJP में शामिल होने का फैसला किया।
राघव चड्ढा ने अपने फैसले के पीछे पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों और विचारधारा में बदलाव को कारण बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है और उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने यह तक कहा कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” बनकर रह गए थे।
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। वे कई महत्वपूर्ण बैठकों और कार्यक्रमों से दूर रहे, जिससे अंदरूनी खींचतान साफ नजर आने लगी थी।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब मानी जा रही है जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में AAP के उप-नेता पद से हटा दिया गया। इसके बाद पार्टी के अंदर उनके रोल को लेकर सवाल उठने लगे और मतभेद खुलकर सामने आने लगे।
AAP के कुछ नेताओं ने उन पर आरोप लगाया कि वे पार्टी लाइन के साथ नहीं चल रहे थे और संसद में भी सक्रिय नहीं थे। वहीं चड्ढा ने इन आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वे गंभीर मुद्दों पर सार्थक बहस में विश्वास रखते हैं, न कि सिर्फ विरोध करने में।
राघव चड्ढा के साथ कई अन्य सांसदों ने भी AAP छोड़ी, जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि अन्य सांसदों का समूह भी उनके साथ BJP में शामिल हुआ, जिससे यह सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं बल्कि एक संगठित राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि चड्ढा और उनके साथियों ने संविधान के उस प्रावधान का इस्तेमाल किया, जिसमें दो-तिहाई सांसदों के साथ पार्टी बदलने पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता।
इसका मतलब यह है कि यह बदलाव कानूनी रूप से वैध माना जाएगा और सांसदों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहेगा।
इस घटनाक्रम से Aam Aadmi Party को बड़ा झटका लगा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह AAP के लिए सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक हो सकता है।
दूसरी ओर, Bharatiya Janata Party के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ AAP तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा।
राघव चड्ढा का AAP छोड़कर BJP में शामिल होना सिर्फ एक नेता का दल बदल नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। यह कदम दिखाता है कि पार्टी के अंदर मतभेद कितने गहरे हो सकते हैं और कैसे एक फैसला पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर AAP और भारतीय राजनीति पर कितना गहरा पड़ता है।