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किरन्दुल निवासी एनएमडीसी कमर्चारी के साथ लोन दिलाकर निवेश कराने के नाम पर बारह लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। बचेली के रमेश पैकरा, उनकी पत्नी निशा पैकरा और रायपुर के दयाशंकर साहू ने कथित तौर पर मिलीभगत कर पीड़ित को विश्वास में लेकर धोखाधड़ी की। किरन्दुल थाने में दर्ज FIR नंबर 0025 के अनुसार, आरोपीयों ने अगस्त 2023 में पीड़ित के घर और बचेली में कई मीटिंग्स कर उन्हें चोलामंडलम फाइनेंस से 12 लाख रुपये का लोन पास कराया।
बीमा कटौती के बाद 11,38,917 रुपये पीड़ित के SBI किरन्दुल खाते (खाता संख्या 30516786131) में क्रेडिट हुए। इसमें से 6 लाख रुपये नकद निकालकर आरोपी रमेश पैकरा को “निवेश” के नाम पर दे दिए गए। साथ ही कमिशन और प्रोसेसिंग फीस के रूप में 80 हजार रुपये (30 हजार + 50 हजार) अलग से नगद दिए गए। आरोपीयों ने आश्वासन दिया कि लोन की सारी किस्तें वे खुद भरेंगे और निवेश से होने वाला फायदा पीड़ित को मिलेगा।
दयाशंकर साहू ने IDFC First Bank, रायपुर ब्रांच का 6 लाख रुपये का चेक (नंबर 004324, 31) और शपथ पत्र भी दिया, लेकिन बाद में सब कुछ झूठा निकला। शुरू में 19 महीनों (अक्टूबर 2023 से जनवरी 2025) तक 4,36,810 रुपये ईएमआई के रूप में ट्रांसफर किए गए, लेकिन अप्रैल 2025 के बाद कोई भुगतान नहीं हुआ। पीड़ित ने खुद मार्च 2025 से जनवरी 2026 तक 2,52,890 रुपये की किस्तें भरी हैं और अभी भी 9,03,272 रुपये बकाया है।
पीड़ित ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि रमेश पैकरा उनका बचपन का दोस्त था। दोनों परिवारों में खूब आना-जाना था। आरोपीयों ने “ट्रेड में निवेश” का लालच देकर उन्हें फंसाया। तीनों ने आपसी साजिश रचकर पीड़ित के नाम पर लोन पास कराया और पैसा हड़प लिया।
किरन्दुल थाने ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी लीला राम गंगबर (SI) को सौंपी गई है।
अब सवाल ये उठता है की, FIR दर्ज होने के बाद भी आरोपी रमेश पैकरा, निशा पैकरा और दयाशंकर साहू को पुलिस ने अभी तक डिमांड में क्यों नहीं लिया? क्या पुलिस ने उनकी संपत्ति और बैंक खातों की जांच शुरू की? क्या आरोपीयों की कोर्ट में डायरी जमा हुई या नहीं?
क्या इन अपराधियों को सजा मिलेगी या वे यूं ही शहर में घूमते रहेंगे? क्या उन्हें दोबारा दुबई भागने का मौका दिया जाएगा?
NMDC और अन्य सरकारी कर्मचारियों के साथ इसी तरह की ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। क्या पीड़ित को उनका पैसा वापस मिलेगा? क्या सैकड़ों-हजारों अन्य पीड़ितों के लाखों रुपये उनके खाते में लौटेंगे?
न्याय की प्रक्रिया कितनी तेज होगी, यह देखना बाकी है। पुलिस और प्रशासन से अपील है कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर आरोपीयों को गिरफ्तार किया जाए, उनकी संपत्ति जब्त की जाए और पीड़ित को न्याय दिलाया जाए।