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दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब रणवीर सिंह ने गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के दौरान कन्नड़ फिल्म कांतारा के एक सीन की मिमिक्री की थी। इस दौरान उनके एक बयान और प्रस्तुति को लेकर आरोप लगा कि उन्होंने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। शिकायतकर्ता का कहना था कि अभिनेता ने ‘दैव’ को गलत तरीके से पेश किया और उसे ‘महिला भूत’ कह दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
इस मामले में रणवीर सिंह के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया और केस रद्द करने की मांग की। सुनवाई के दौरान उन्होंने 25 अप्रैल को एक संशोधित हलफनामा (revised affidavit) दाखिल किया, जिसमें बिना शर्त माफी व्यक्त की गई। कोर्ट ने इस नए हलफनामे को ध्यान में रखते हुए उनकी माफी को स्वीकार कर लिया और संकेत दिया कि अब इस मामले को समाप्त किया जा सकता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि रणवीर सिंह को अगले चार हफ्तों के भीतर मैसूर के चामुंडेश्वरी मंदिर जाकर अपनी गलती के लिए खेद व्यक्त करना होगा। यह निर्देश उनके द्वारा दिए गए आश्वासन का हिस्सा है, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया है।
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद कांतारा फिल्म में दिखाए गए पारंपरिक ‘भूता कोला’ से जुड़े धार्मिक प्रतीकों की प्रस्तुति पर आधारित था। रणवीर सिंह ने बाद में सोशल मीडिया के जरिए भी माफी मांगी थी, लेकिन शिकायतकर्ता का कहना था कि शुरुआती माफी में सच्चा पछतावा नहीं दिखता। इसी वजह से मामला अदालत तक पहुंचा।
अब हाई कोर्ट द्वारा माफी स्वीकार किए जाने और केस बंद होने के संकेत के बाद, रणवीर सिंह को इस विवाद से बड़ी राहत मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, मंदिर जाकर माफी मांगने की शर्त पूरी करना अभी बाकी है, जिसके बाद ही इस पूरे मामले पर अंतिम रूप से पर्दा गिर सकता है।