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ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर के पार: ईरान युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट ठप, महंगाई का खतरा

ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग ठप, ब्रेंट क्रूड 4 साल के उच्चतम स्तर 125 डॉलर पर। भारत की महंगाई पर दबाव।

मुंबई/नई दिल्ली, 30 अप्रैल 2026 – ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग बाधित होने से बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। यह जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

लगातार आठवें सत्र में तेजी के साथ ब्रेंट ने बाजार को हिला दिया है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है, जो फरवरी के अंत से लगभग ठप पड़ा है।

क्यों बढ़ रहा है तेल?

नौसैनिक नाकेबंदी: अमेरिका के नेतृत्व में ईरान के बंदरगाहों पर नाकेबंदी से अप्रैल के मध्य तक करीब 50 अरब डॉलर का कच्चा तेल सप्लाई से बाहर हो चुका है

बातचीत फंसी:

अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की बातचीत अटकी हुई है, जिससे स्ट्रेट के जल्द खुलने की उम्मीद कम है

स्टॉक में गिरावट:

अप्रैल में दुनियाभर में तेल का भंडार रोजाना 1.1-1.2 करोड़ बैरल की दर से घट रहा है

बाजार पर असर:

अमेरिकी WTI क्रूड भी 7% बढ़कर 107.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका में पेट्रोल और डीजल का स्टॉक गर्मी के ड्राइविंग सीजन से पहले उम्मीद से ज्यादा गिरा है।इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे रिकॉर्ड स्तर का सबसे बड़ा सप्लाई शॉक बताया है। वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि अगर ये स्थिति जारी रही तो 2026 में एनर्जी की कीमतें 24% तक बढ़ सकती हैं।

भारत पर असर:

तेल की ये तेजी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बनाएगी। कोटक सिक्योरिटीज के एनालिस्ट अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो ब्रेंट 130-140 डॉलर तक जा सकता है।

इसी बीच यूएई ने अगले महीने OPEC छोड़ने का ऐलान किया है ताकि वो अपनी प्रोडक्शन में ज्यादा लचीलापन ला सके।

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