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कागजों में फायर NOC, जमीन पर खतरा! नोएडा की सोसाइटियों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

नोएडा की चमचमाती हाईराइज़ सोसाइटियां बाहर से जितनी आधुनिक और सुरक्षित दिखती हैं, अंदर से उतनी ही लापरवाही और अव्यवस्था का शिकार होती जा रही हैं। सेक्टर-75 स्थित फूटेक गेटवे , प्लॉट No. 10 में लगातार सामने आ रही आग की घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक हजारों लोगों की जान भगवान भरोसे छोड़ी जाएगी?

पिछले कुछ महीनों में इस सोसाइटी में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं। हाल ही में ए-1 टावर में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाना पड़ा। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि मेंटेनेंस और सिक्योरिटी स्टाफ ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, वरना यह हादसा कई परिवारों के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।

चिंता की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं थी। सोसाइटी के अलग-अलग हिस्सों में कई बार एमसीबी में आग लग चुकी है। वहीं कई फ्लैट्स में एसी के कंप्रेसर और आउटडोर यूनिट्स में आग लगने की घटनाएं भी सामने आई हैं। लगातार हो रही ये घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि पूरी इलेक्ट्रिकल और फायर सेफ्टी व्यवस्था गंभीर खतरे में है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोसाइटी का फायर फाइटिंग सिस्टम या तो बंद पड़ा है या फिर सही तरीके से काम नहीं कर रहा। कई जगहों पर उपकरण सिर्फ दिखावे के लिए लगे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि 2800 KVA के स्वीकृत विद्युत लोड के मुकाबले यहां पर्याप्त ट्रांसफॉर्मर तक नहीं लगाए गए। 500 से ज्यादा परिवारों का भार झेल रहा सिस्टम लगातार ओवरलोड हो रहा है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

इतना ही नहीं, बी2और बी3 जैसे टावरों में सुरक्षित फायर एग्जिट तक नहीं होने की बात सामने आ रही है। अगर किसी दिन ऊपरी मंजिलों में बड़ी आग लग गई तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिल्डर और संबंधित एजेंसियां किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेंगी?

नोएडा में पहले भी कई सोसाइटियों और कमर्शियल इमारतों में आग की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन हर बार कुछ दिनों की जांच और औपचारिक कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। फायर एनओसी सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है, जबकि जमीन पर सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे छोड़ दिए जाते हैं।

फूटेक गेटवे निवासियों ने अब प्रशासन से तत्काल थर्ड पार्टी फायर और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी सोसाइटी को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक नियमित मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नोएडा प्राधिकरण और फायर विभाग समय रहते इस खतरे को गंभीरता से लेंगे, या फिर किसी बड़े हादसे और मासूम जानों के नुकसान के बाद कार्रवाई की जाएगी?

नोएडा की हजारों हाईराइज़ इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा अब सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन और मौत का सवाल बन चुकी है।

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