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नई दिल्ली:
भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब Artificial Intelligence से बनाए गए कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य फर्जी खबरों, डीपफेक और भ्रामक जानकारी पर रोक लगाना है।
सरकार के निर्देश के मुताबिक:
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI से बने कंटेंट पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल (label) लगाना होगा
- कंटेंट में विशेष पहचान (identifier/metadata) भी शामिल करनी होगी
- ताकि यूजर्स आसानी से समझ सकें कि यह कंटेंट इंसान ने बनाया है या AI ने
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
पिछले कुछ समय में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जिससे:
- डीपफेक (Deepfake) वीडियो और तस्वीरें बढ़ी हैं
- फेक न्यूज और गलत जानकारी तेजी से फैल रही है
- लोगों को असली और नकली कंटेंट में फर्क करना मुश्किल हो रहा है
सरकार का मानना है कि बिना लेबल वाले AI कंटेंट से जनता को गुमराह करने का खतरा बढ़ता है
नए नियमों के तहत:
- सोशल मीडिया कंपनियों को AI कंटेंट पहचानने के लिए ऑटोमेटेड टूल्स लगाने होंगे
- यूजर्स को भी बताना होगा कि उनका कंटेंट AI से बना है
- अगर कोई नियमों का पालन नहीं करता, तो प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई हो सकती है
नई गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि:
- आपत्तिजनक या भ्रामक कंटेंट को कुछ घंटों के भीतर हटाना होगा
- नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म अपनी कानूनी सुरक्षा (safe harbour) खो सकते हैं
ग्लोबल ट्रेंड से जुड़ा फैसला
भारत का यह कदम दुनिया के अन्य देशों के साथ मेल खाता है, जहां:
- AI कंटेंट की पहचान और पारदर्शिता पर जोर दिया जा रहा है
- गलत जानकारी और डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जा रहे हैं
सरकार का यह फैसला डिजिटल दुनिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स इन नियमों को कैसे लागू करते हैं और इससे फेक कंटेंट पर कितना असर पड़ता है।