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समिति द्वारा किया गया राजकीय बालगृह बालक सूरजकुण्ड, राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर एवं राजकीय महिला शरणालय, राजकीय पश्चातवर्ती देखरेख संगठन, राजकीय बालगृह शिशु मेरठ का आकस्मिक निरीक्षण

समिति द्वारा आज राजकीय बालगृह, बालक सूरजकुण्ड, राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर, मेरठ एवं राजकीय महिला शरणालय, राजकीय पश्चातवर्ती देखरेख संगठन, राजकीय बालगृह शिशु, मेरठ का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान समिति के सदस्यगण श्रीमती शिवानी सिंह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पोक्सो) न्यायालय सं० 01, मेरठ, श्री रमेश कुशवाहा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय सं० 19, मेरठ, श्री नीरज कुशवाहा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, मेरठ, सुश्री सोनिका वर्मा सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ एवं श्री शिखर अग्रवाल प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड, मेरठ उपस्थित रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान समिति द्वारा राजकीय बालगृह, बालक सूरजकुण्ड, राजकीय महिला शरणालय, राजकीय पश्चातवर्ती देखरेख संगठन एवं राजकीय बालगृह शिशु, मेरठ में निवास कर रहे बालकों/संवासिनियों तथा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) मेरठ में निरुद्ध किशोरों को उपलब्ध करायी जा रही मूलभूत सुविधाओं, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता एवं सुरक्षा व्यवस्था आदि का जायजा लिया गया तथा संबंधित अधिकारियों से व्यवस्थाओं के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये गये। 
 राजकीय बालगृह, बालक सूरजकुण्ड, मेरठ के निरीक्षण के दौरान बालकों को उपलब्ध करायी जा रही सुविधाओं, भोजन, चिकित्सा, शिक्षा, आवासीय व्यवस्था एवं स्वच्छता आदि का निरीक्षण किया गया। बालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी प्राप्त की गयी तथा संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये। 

इसी क्रम में राजकीय सम्प्रेक्षण गृह किशोर, मेरठ के निरीक्षण के दौरान निरुद्ध किशोरों से उनकी समस्याओं एवं विधिक सहायता के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गयी। किशोरों को उपलब्ध करायी जा रही विधिक सहायता की स्थिति की भी जानकारी ली गयी तथा जिन किशोरों के पास अपने अधिवक्ता नहीं है उनके लिये निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये। सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निरुद्ध किशोरों के अधिकारों तथा उन्हें प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी न होने पाये तथा शासन एवं विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जाये।

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