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NMDC बी आई ओ एम किरंदुल काम्प्लेक्स में उद्योग एवं श्रमिक हित में कार्यरत श्रमसंगठन इंटक के राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व एवं छत्तीसगढ़ राज्य इंटक के मार्गदर्शन में मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) किरंदुल द्वारा कैडर डेवलपमेंट की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय एवं दूरदर्शी पहल करते हुए दिनांक 22 मार्च 2026 को अध्यक्ष श्री विनोद कश्यप जी एवं सचिव श्री ए.के. सिंह जी के कुशल नेतृत्व में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस महत्वपूर्ण पहल ने श्रमिक साथियों के बीच नई ऊर्जा, उत्साह एवं जागरूकता का संचार करते हुए संगठन को सशक्त एवं संगठित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार स्थापित किया।
इसी क्रम में प्रशिक्षण सत्र के अंतर्गत चतुर्थ सप्ताह, दिनांक 12 अप्रैल 2026 को यूनियन के वरिष्ठ सदस्या सम्माननीया श्रीमती बीना यादव जी द्वारा “श्रमिक बौद्धिक विकास प्रशिक्षण” विषय पर अत्यंत सरल, प्रभावी एवं व्यवहारिक शैली में महत्वपूर्ण जानकारी गांधी भवन (इंटक श्रमिक सदन) किरंदुल में प्रदान की गई।
अपने सारगर्भित व्याख्यान में उन्होंने श्रमिक हितों से जुड़े विविध महत्वपूर्ण विषयों कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं जिम्मेदारियां, संगठन की भूमिका एवं महत्व, नेतृत्व क्षमता का विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए ईपीएस-95 (कर्मचारी पेंशन योजना) पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने वाली एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत 58 वर्ष की आयु के पश्चात मासिक पेंशन प्रदान की जाती है। यह योजना सेवानिवृत्ति, शीघ्र सेवानिवृत्ति एवं स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करती है तथा सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार को भी पेंशन का लाभ सुनिश्चित करती है। इस योजना में योगदान नियोक्ता द्वारा किया जाता है, जो कर्मचारी के वेतन (Basic + DA) का 8.33% भाग (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) पेंशन फंड में जमा करता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा आवश्यक है तथा वर्तमान में न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक लचीली एवं आधुनिक पेंशन योजना है, जिसमें कर्मचारी के वेतन का एक निर्धारित हिस्सा जमा होता है तथा 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन प्राप्त होती है। इस योजना में 60% तक राशि एकमुश्त निकालने की सुविधा इसे और अधिक उपयोगी बनाती है। एकजुटता, अनुशासन एवं सही दिशा में किया गया सामूहिक प्रयास न केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है,
बल्कि उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को भी सुदृढ़ बनाता है।
सत्र के दौरान यूनियन के श्रमिक साथियों ने अत्यंत उत्साह, सक्रिय सहभागिता एवं जिज्ञासा के साथ भाग लिया, जिससे उनका ज्ञान एवं दृष्टिकोण और अधिक समृद्ध हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल जानकारी प्रदान करने तक सीमित न रहकर श्रमिकों के समग्र बौद्धिक, व्यावहारिक एवं संगठनात्मक विकास का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
निस्संदेह, जब श्रमिक ज्ञान, जागरूकता एवं सशक्त मार्गदर्शन से समृद्ध होते हैं, तब संगठन और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं हितोन्मुखी बनता है। यह पहल श्रमिकों, संगठन एवं समाज—तीनों के समग्र विकास की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं सराहनीय प्रयास है।
मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन इसी प्रकार रचनात्मक, संगठित एवं श्रमिक हितों के प्रति पूर्णतः समर्पित भाव से निरंतर अग्रसर है।
इंटक से संबद्ध मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन किरंदुल द्वारा कैडर डेवलपमेंट हेतु सशक्त, प्रभावशाली एवं दूरदर्शी प्रशिक्षण कार्यक्रम की ऐतिहासिक पहल
NMDC बी आई ओ एम किरंदुल काम्प्लेक्स में उद्योग एवं श्रमिक हित में कार्यरत श्रमसंगठन इंटक के राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व एवं छत्तीसगढ़ राज्य इंटक के मार्गदर्शन में मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) किरंदुल द्वारा कैडर डेवलपमेंट की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय एवं दूरदर्शी पहल करते हुए दिनांक 22 मार्च 2026 को अध्यक्ष श्री विनोद कश्यप जी एवं सचिव श्री ए.के. सिंह जी के कुशल नेतृत्व में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस महत्वपूर्ण पहल ने श्रमिक साथियों के बीच नई ऊर्जा, उत्साह एवं जागरूकता का संचार करते हुए संगठन को सशक्त एवं संगठित बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार स्थापित किया।
इसी क्रम में प्रशिक्षण सत्र के अंतर्गत चतुर्थ सप्ताह, दिनांक 12 अप्रैल 2026 को यूनियन के वरिष्ठ सदस्या सम्माननीया श्रीमती बीना यादव जी द्वारा “श्रमिक बौद्धिक विकास प्रशिक्षण” विषय पर अत्यंत सरल, प्रभावी एवं व्यवहारिक शैली में महत्वपूर्ण जानकारी गांधी भवन (इंटक श्रमिक सदन) किरंदुल में प्रदान की गई।
अपने सारगर्भित व्याख्यान में उन्होंने श्रमिक हितों से जुड़े विविध महत्वपूर्ण विषयों कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं जिम्मेदारियां, संगठन की भूमिका एवं महत्व, नेतृत्व क्षमता का विकास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए ईपीएस-95 (कर्मचारी पेंशन योजना) पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह योजना कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने वाली एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसके अंतर्गत 58 वर्ष की आयु के पश्चात मासिक पेंशन प्रदान की जाती है। यह योजना सेवानिवृत्ति, शीघ्र सेवानिवृत्ति एवं स्थायी विकलांगता की स्थिति में आर्थिक संबल प्रदान करती है तथा सदस्य की मृत्यु होने पर उसके परिवार को भी पेंशन का लाभ सुनिश्चित करती है। इस योजना में योगदान नियोक्ता द्वारा किया जाता है, जो कर्मचारी के वेतन (Basic + DA) का 8.33% भाग (अधिकतम ₹15,000 की सीमा तक) पेंशन फंड में जमा करता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पेंशन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा आवश्यक है तथा वर्तमान में न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक लचीली एवं आधुनिक पेंशन योजना है, जिसमें कर्मचारी के वेतन का एक निर्धारित हिस्सा जमा होता है तथा 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन प्राप्त होती है। इस योजना में 60% तक राशि एकमुश्त निकालने की सुविधा इसे और अधिक उपयोगी बनाती है। एकजुटता, अनुशासन एवं सही दिशा में किया गया सामूहिक प्रयास न केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करता है,
बल्कि उनके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को भी सुदृढ़ बनाता है।
सत्र के दौरान यूनियन के श्रमिक साथियों ने अत्यंत उत्साह, सक्रिय सहभागिता एवं जिज्ञासा के साथ भाग लिया, जिससे उनका ज्ञान एवं दृष्टिकोण और अधिक समृद्ध हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल जानकारी प्रदान करने तक सीमित न रहकर श्रमिकों के समग्र बौद्धिक, व्यावहारिक एवं संगठनात्मक विकास का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
निस्संदेह, जब श्रमिक ज्ञान, जागरूकता एवं सशक्त मार्गदर्शन से समृद्ध होते हैं, तब संगठन और अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं हितोन्मुखी बनता है। यह पहल श्रमिकों, संगठन एवं समाज—तीनों के समग्र विकास की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं सराहनीय प्रयास है।
मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन इसी प्रकार रचनात्मक, संगठित एवं श्रमिक हितों के प्रति पूर्णतः समर्पित भाव से निरंतर अग्रसर है।