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अमेरिका-ईरान और Middle East में बढ़ते तनाव को लेकर रेटिंग एजेंसी CRISIL ने भारत के लिए बड़ी चेतावनी जारी की है। एजेंसी का कहना है कि अगर यह युद्ध लंबा चला या और बड़ा हुआ तो भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और महंगाई को लेकर बताया गया है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से तेल आयात करके पूरा करता है। Middle East में तनाव बढ़ने के बाद crude oil की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Brent Crude कई बार 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है।
अगर तेल महंगा होता है तो:
CRISIL ने कहा कि भारत की financial conditions पहले से दबाव में हैं और अगर तेल संकट और बढ़ा तो इसका असर growth, inflation और investment पर पड़ सकता है। एजेंसी ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी को भी चिंता का बड़ा कारण बताया।
Middle East तनाव के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में अब तक अरबों डॉलर का विदेशी निवेश बाहर जा चुका है और रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंचा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो:
दुनिया के बड़े हिस्से का तेल Hormuz Strait से होकर गुजरता है। अगर वहां सप्लाई प्रभावित होती है तो पूरी दुनिया में तेल संकट गहरा सकता है। भारत भी इससे सीधे प्रभावित होगा क्योंकि देश Middle East से भारी मात्रा में तेल खरीदता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत रूस समेत दूसरे देशों से तेल खरीद बढ़ाने और सप्लाई diversification पर काम कर रहा है। सरकार रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक सप्लाई रूट्स पर भी फोकस कर रही है।
CRISIL की चेतावनी के बाद सोशल media पर “Oil Crisis” और “Middle East War Impact” जैसे keywords ट्रेंड करने लगे। लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता जता रहे हैं।