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ईरान-अमेरिका जंग का असर अब किचन तक, 4 महीने में दोगुनी हुई खाने के तेल की कीमतें

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। पेट्रोल-डीजल और गैस के बाद अब खाने वाले तेल की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले चार महीनों में सरसों तेल से लेकर रिफाइंड ऑयल तक के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक कई ब्रांडेड खाने वाले तेल अब पैकिंग और कैटेगरी के हिसाब से 110 रुपये से लेकर 207 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहे हैं। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह आम परिवारों के बजट पर सीधा असर डाल रही है।

क्यों बढ़ रहे हैं खाने वाले तेल के दाम?

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-अमेरिका युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे सिर्फ ईंधन ही नहीं बल्कि खाद्य तेल बाजार भी प्रभावित हो गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।

जानकारों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, प्लास्टिक और पेपर कॉस्ट भी बढ़ गई है। इसका असर FMCG कंपनियों की लागत पर पड़ रहा है और आखिरकार इसकी मार ग्राहकों पर पड़ रही है।

सिर्फ तेल नहीं, ये चीजें भी होंगी महंगी

खाने वाले तेल की महंगाई सिर्फ किचन ऑयल तक सीमित नहीं रहती। इसका असर बिस्कुट, नमकीन, बेकरी आइटम, फ्रोजन फूड, इंस्टेंट मील और रेडी-टू-ईट उत्पादों पर भी पड़ रहा है। कंपनियां बढ़ती लागत को धीरे-धीरे ग्राहकों से वसूल रही हैं।

वैश्विक बाजार में भी बढ़ी चिंता

रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है। कई बार कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुका है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो भारत समेत कई देशों में खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं। इससे आम आदमी का घरेलू बजट और ज्यादा बिगड़ सकता है।

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