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किसकी बनेगी सरकार? एग्जिट पोल में आया बड़ा संकेत, बंगाल-केरल में सस्पेंस

तमिलनाडु: DMK की आसान वापसी के संकेत

आज आए एग्जिट पोल के आंकड़ों को अगर आसान भाषा में समझें, तो अलग-अलग राज्यों में तस्वीर अलग नजर आ रही है। तमिलनाडु में ज्यादातर एजेंसियां यही दिखा रही हैं कि DMK गठबंधन को करीब 140 से 165 सीट मिल सकती हैं, जबकि AIADMK गठबंधन 60 से 90 सीट के बीच सिमटता दिख रहा है। बाकी छोटी पार्टियों को 5 से 15 सीट मिल सकती हैं। यानी कुल मिलाकर M. K. Stalin की सरकार आराम से दोबारा बनती दिख रही है और यहां बड़ा उलटफेर होने के आसार कम हैं।

असम: BJP की पकड़ अभी भी मजबूत

असम की बात करें तो यहां BJP की पकड़ अभी भी मजबूत नजर आ रही है। एग्जिट पोल के मुताबिक BJP गठबंधन को 70 से 85 सीट मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस गठबंधन 35 से 50 सीट तक रह सकता है। अन्य पार्टियों के खाते में 5 से 10 सीट जा सकती हैं। आसान शब्दों में कहें तो Himanta Biswa Sarma की सरकार एक बार फिर बनती दिख रही है और यहां मुकाबला ज्यादा कड़ा नहीं लग रहा।

पुडुचेरी: NDA को मिलती बढ़त

पुडुचेरी में भी ट्रेंड NDA के पक्ष में जाता दिख रहा है। यहां NDA को 16 से 22 सीट मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस-DMK गठबंधन को 8 से 13 सीट मिलने का अनुमान है। बाकी सीटें बहुत कम बचती हैं। मतलब साफ है कि इस छोटे राज्य में भी NDA को बढ़त मिलती नजर आ रही है और सरकार दोबारा बन सकती है।

पश्चिम बंगाल: Mamata Banerjee बनाम BJP, कांटे की टक्कर

अब अगर पश्चिम बंगाल की बात करें, तो यहां मामला सबसे ज्यादा दिलचस्प और टक्कर वाला है। एग्जिट पोल के हिसाब से TMC को 130 से 160 सीट मिल सकती हैं, जबकि BJP 120 से 150 सीट के बीच रह सकती है। लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन को 10 से 25 सीट मिलने का अनुमान है। यानी यहां सीधी लड़ाई Mamata Banerjee और BJP के बीच है, और नतीजे वाले दिन ही साफ होगा कि असली बाजी कौन मारता है।

केरल: करीबी मुकाबला, नतीजे पर टिकी नजर

केरल में भी मुकाबला काफी करीबी दिख रहा है। LDF को 65 से 80 सीट मिल सकती हैं, जबकि UDF 60 से 75 सीट के बीच रह सकता है। BJP को यहां ज्यादा फायदा मिलता नहीं दिख रहा और 0 से 3 सीट तक ही सीमित रह सकती है। कुल मिलाकर केरल में भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है और रिजल्ट वाले दिन ही पता चलेगा कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

ध्यान रखने वाली बात ये है कि ये सारे आंकड़े एग्जिट पोल के हैं, जो सिर्फ अनुमान होते हैं। कई बार ये बिल्कुल सही बैठते हैं, तो कई बार पूरी तरह गलत भी साबित हो जाते हैं। इसलिए असली तस्वीर तो वोटों की गिनती वाले दिन ही सामने आएगी।

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