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मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच अहम बातचीत हुई है, जिसने वैश्विक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar को फोन कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं और कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है। दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात को लेकर अपने-अपने नजरिए साझा किए और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
इस बातचीत का सबसे अहम मुद्दा Strait of Hormuz रहा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में अगर यहां किसी भी तरह का तनाव या बाधा आती है, तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है। हाल के दिनों में इस इलाके में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और टकराव की घटनाओं ने चिंता को और बढ़ा दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है।
दरअसल, मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव की जड़ अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद में भी देखी जा रही है। इसके अलावा, समुद्री रास्तों पर जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी कई बार खतरे की स्थिति बनी है। कुछ घटनाओं में जहाजों को रोके जाने या उन पर हमले की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ा है। ऐसे हालात में भारत जैसे देश, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात करते हैं, स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं और स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि उसकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। साथ ही, भारतीय व्यापारिक जहाज भी इसी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में S. Jaishankar लगातार अलग-अलग देशों के संपर्क में बने हुए हैं, ताकि हालात को समझा जा सके और जरूरत पड़ने पर जरूरी कदम उठाए जा सकें। भारत का रुख हमेशा से यही रहा है कि किसी भी तरह के विवाद का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।
इस फोन कॉल के जरिए भी यही संदेश देने की कोशिश की गई है कि भारत और ईरान दोनों ही क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं और किसी भी बड़े टकराव से बचना चाहते हैं। बातचीत में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इससे यह साफ होता है कि आने वाले समय में भारत इस मामले में सक्रिय भूमिका निभा सकता है और स्थिति को शांत रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखेगा।
आसान भाषा में समझें तो इस समय पूरा मामला Strait of Hormuz के आसपास केंद्रित है, जहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया पर असर डाल सकता है। तेल की कीमतों से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक, सब पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए भारत जैसे देश पहले से ही सतर्क हो गए हैं और हर स्तर पर बातचीत बनाए रख रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मध्य पूर्व में हालात किस दिशा में जाते हैं। अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक बातचीत के जरिए हालात को संभालने की कोशिश जारी है और भारत भी इसमें सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रहा है।