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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता के बीच भारत सरकार के आंकड़ों ने बड़ी राहत दी है। ताज़ा सरकारी डेटा के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत ने करीब 10 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) डीजल का उत्पादन किया, जबकि घरेलू मांग लगभग 8 MMT रही। यानी देश में डीजल की सप्लाई फिलहाल मांग से काफी ज्यादा बनी हुई है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगातार बढ़ रही है और देश दुनिया के बड़े रिफाइनिंग हब के रूप में उभर रहा है। भारत में हाई-स्पीड डीजल कुल पेट्रोलियम उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में फिलहाल ईंधन की कोई कमी नहीं है। IndianOil ने भी हाल ही में बयान जारी कर कहा था कि देशभर में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और बढ़ती मांग के बावजूद वितरण व्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता और पर्याप्त स्टोरेज के कारण वैश्विक संकट का असर फिलहाल सीमित दिखाई दे रहा है। भारत के पास करीब 74 दिनों की कुल तेल और पेट्रोलियम स्टोरेज क्षमता मौजूद है, जिससे आपात स्थिति में भी सप्लाई बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि भारत अब भी कच्चे तेल के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में अगर पश्चिम एशिया संकट और बढ़ता है तो भविष्य में तेल कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद सरकार का दावा है कि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता पूरी तरह स्थिर है।