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नोएडा, 28 अप्रैल 2026: शादी में DJ बजाना एक परिवार को भारी पड़ गया। नोएडा के पास एक गांव में पंचायत ने DJ बजाने वाले परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। गांव में ढोल-नगाड़े बजाकर मुनादी कराई गई कि कोई भी इस परिवार से न तो बात करेगा, न ही उनके किसी कार्यक्रम में शामिल होगा।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, गांव के एक परिवार ने हाल ही में हुई शादी में तेज आवाज में DJ बजाया था। इससे नाराज होकर गांव की पंचायत बैठी। पंचायत ने फैसला सुनाया कि DJ बजाना गांव के ‘सामाजिक नियमों’ के खिलाफ है। इसके बाद ढोल बजाकर पूरे गांव में ऐलान किया गया कि इस परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया है।
पंचायत ने साफ चेतावनी दी कि जो भी व्यक्ति इस परिवार से संबंध रखेगा या उनके घर जाएगा, उस पर ₹11,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही उसका भी सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
DJ बैन के पीछे की वजह क्या?
गांव वालों का कहना है कि DJ की तेज आवाज से गांव का माहौल खराब होता है। हरियाणा के रुहल खाप ने पहले भी कहा था कि “DJ की वजह से युवा शराब पीकर लड़कियों से बदतमीजी करते हैं और महिलाएं घर से नहीं निकल पातीं”।
कई गांवों में DJ को ‘शादी में हिंसा की जड़’ माना जाता है। 2012 में कैथल के खुर्दा गांव में DJ पर गाना बजाने को लेकर हुए विवाद में एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद ड्योढ़ा खेड़ी गांव की पंचायत ने DJ पर बैन लगा दिया और नियम तोड़ने पर ₹21,000 जुर्माना तय किया।
हरियाणा का अंटारी गांव भी लगा चुका है बैन
हाल ही में हरियाणा के नारनौल के अंटारी गांव ने भी DJ, दहेज, मृत्यु भोज और कुआं पूजन पर बैन लगाया था। गांव ने फैसला लिया था कि नियम तोड़ने वालों का पूरा सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। मथुरा में मुस्लिम समुदाय की पंचायत ने भी DJ पर बैन लगाया और ₹11,000 जुर्माना तय किया।
कानूनी कार्रवाई भी होती है DJ पर
नोएडा में ही पहले DJ को रात 10 बजे के बाद तेज आवाज में म्यूजिक बजाने पर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस ने Noise Pollution Act के तहत केस दर्ज किया था। जून 2022 में भी नोएडा पुलिस ने 4 DJ वालों को गिरफ्तार किया था।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि पंचायतों को सामाजिक सुधार के लिए नियम बनाने का हक है, लेकिन सामाजिक बहिष्कार गैरकानूनी है। Protection of Civil Rights Act के तहत किसी का हुक्का-पानी बंद करना अपराध है। तेलंगाना के मेडक में दलित परिवार का बहिष्कार करने पर 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।