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AIMIM प्रमुख Asaduddin Owaisi ने केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “जन गण मन और वंदे मातरम् बराबर नहीं हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दोनों को समान दर्जा देने की कोशिश कर रही है, जो संविधान की भावना के खिलाफ है।
यह विवाद केंद्र सरकार की उस नई गाइडलाइन के बाद शुरू हुआ जिसमें सरकारी कार्यक्रमों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
ओवैसी ने कहा कि भारत का आधिकारिक राष्ट्रगान सिर्फ ‘जन गण मन’ है और संविधान में उसी को मान्यता मिली हुई है। उनके मुताबिक ‘वंदे मातरम्’ एक राष्ट्रीय गीत जरूर है, लेकिन उसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए किसी खास गीत को गाने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए।
ओवैसी के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। बीजेपी नेताओं ने उनके बयान की आलोचना करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आजादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है और उसका सम्मान करना हर भारतीय का कर्तव्य है।
वहीं विपक्ष के कुछ नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है और संविधान में जो व्यवस्था है, उसी का पालन होना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया था। आजादी की लड़ाई के दौरान यह गीत आंदोलन का बड़ा प्रतीक बना था। हालांकि समय-समय पर इसके कुछ हिस्सों को लेकर विवाद भी उठते रहे हैं।
भारत के संविधान में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत माना जाता है।
ओवैसी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स इसे राष्ट्रगीत का अपमान बता रहे हैं।