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रूस ने अपनी सबसे शक्तिशाली इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) RS-28 Sarmat का सफल परीक्षण किया है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने दावा किया कि इस मिसाइल की मारक क्षमता 35 हजार किलोमीटर से भी ज्यादा हो सकती है और इसे दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल प्रणाली बताया।
रूस के अनुसार यह मिसाइल साल 2026 के अंत तक सेना में पूरी तरह तैनात कर दी जाएगी। इस परीक्षण को रूस की परमाणु ताकत और रणनीतिक सैन्य क्षमता के बड़े प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
RS-28 Sarmat एक परमाणु क्षमता वाली इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है जिसे पश्चिमी देशों में “Satan-II” के नाम से भी जाना जाता है। यह रूस की पुरानी Soviet-era मिसाइलों को रिप्लेस करने के लिए विकसित की गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम है और किसी भी आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है।
राष्ट्रपति Vladimir Putin ने परीक्षण के बाद कहा कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर मिसाइल प्रणाली है और इसकी क्षमता किसी भी पश्चिमी मिसाइल सिस्टम से ज्यादा है। उन्होंने दावा किया कि यह मिसाइल वर्तमान और भविष्य के सभी एयर डिफेंस सिस्टम को भेद सकती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच इस परीक्षण ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण पश्चिमी देशों और NATO को रूस की परमाणु क्षमता का सीधा संदेश है।
रूस पिछले कुछ वर्षों से अपनी न्यूक्लियर फोर्स को आधुनिक बनाने में जुटा है। सरमत मिसाइल के अलावा रूस हाइपरसोनिक मिसाइल, परमाणु ड्रोन और नई क्रूज मिसाइलों पर भी तेजी से काम कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक:
रूस ने पहली बार 2022 में इस मिसाइल का परीक्षण किया था। हालांकि इसके बाद कई परीक्षणों में तकनीकी दिक्कतों की रिपोर्ट भी सामने आई थीं। अब रूस ने दावा किया है कि नया परीक्षण पूरी तरह सफल रहा है।