1
1
1
2
3
गौतमबुद्धनगर 15 जून, मुख्य विकास अधिकारी गौतमबुद्धनगर भालचंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के ऑडिटोरियम में जनपद के होटल, रेस्टोरेंट,मैरिज हॉल, मॉल, क्लब, बार, सिनेमा हॉल, गेमिंग जोन, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर, पीजी, एवं अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के स्वामियों एवं प्रबंधकों के साथ संभावित आपदा से सुरक्षा की दृष्टिगत अग्निकांड से बचाव एवं अन्य संभावित आपदाओं के पूर्व तैयारी/न्यूनीकरण के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्धनगर एक प्रमुख औद्योगिक एवं व्यावसायिक जनपद है, जहां बड़ी संख्या में नागरिक एवं आगंतुक विभिन्न सार्वजनिक एवं निजी प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन आते-जाते हैं। ऐसे में जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की दुर्घटना की रोकथाम के लिए सभी संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में विभिन्न स्थानों पर हुई अग्निकांड की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। जनपद में स्थित सभी हाईराइज भवनों, होटलों, गेस्ट हाउसों, अस्पतालों, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मॉल, स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों, कार्यालयों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों का विशेष संयुक्त अग्नि सुरक्षा निरीक्षण अभियान संचालित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों द्वारा संयुक्त निरीक्षण टीमें गठित की जाएंगी तथा उच्च जोखिम वाले भवनों एवं प्रतिष्ठानों का निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिष्ठानों को निर्देशित किया कि उनकी फायर एनओसी वैध एवं अद्यतन हो, फायर अलार्म सिस्टम पूर्णतः कार्यशील रहे, पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हों तथा स्प्रिंकलर एवं हाइड्रेंट सिस्टम नियमित रूप से संचालित अवस्था में बनाए रखें। सभी आपातकालीन निकास मार्ग बाधारहित रखे जाएं तथा एंट्री एवं एग्जिट प्वाइंट पर प्रकाशयुक्त संकेतक एवं दिशा सूचक बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि अग्निशमन विभाग द्वारा सभी संवेदनशील संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा तथा जिन संस्थानों में फायर एनओसी नहीं है अथवा सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नियमित फायर ड्रिल एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने पर भी बल दिया, जिससे कर्मचारियों एवं आमजन को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके। प्रत्येक अस्पताल में आपदा प्रबंधन टीम गठित हो, आपदा प्रबंधन योजना अद्यतन रखा जाए तथा ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को हर समय सक्रिय रखा जाए। ऑक्सीजन प्लांट, मेडिकल गैस पाइपलाइन, वेंटिलेटर, जीवनरक्षक दवाओं, आपदा किट एवं अतिरिक्त बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अस्पतालों में भीड़ प्रबंधन, आगंतुकों के नियंत्रित प्रवेश, सीसीटीवी निगरानी, 24×7 कंट्रोल रूम तथा सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली को प्रभावी रूप से संचालित रखने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि सभी अस्पतालों, विद्यालयों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाए तथा कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं संबंधित कार्मिकों को आपातकालीन निकासी, प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाए। प्रत्येक प्रतिष्ठान/संस्थान अपनी अपनी अद्यतन आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर और उसकी हार्ड कॉपी जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कार्यालय एवं संबंधित विभाग को उपलब्ध कराई जाए। एक इमरजेंसी इंचार्ज भी नामित किया जाए जो लिखित में हो । साथ ही सभी प्रतिष्ठान/संस्थानों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम, सायरन, अलार्म सिस्टम, आपातकालीन संपर्क सूची, पुलिस, फायर,आपदा एवं स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित किए जाएं, जिससे आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करना सुनिश्चित करें तथा निरीक्षण रिपोर्ट जिला प्रशासन/जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराएं। गंभीर कमियां पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार नोटिस जारी करते हुए सीलिंग, संचालन प्रतिबंध अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संचालकों एवं प्रबंधकों से आह्वान किया कि वे सुरक्षा को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि अपनी संस्थागत कार्यप्रणाली का अभिन्न अंग बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना, नियमित प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, फायर सेफ्टी ऑडिट एवं सुरक्षा मानकों का पूर्ण अनुपालन ही संभावित आपदाओं से जन-धन की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है। विद्युत सुरक्षा को विशेष महत्व देते हुए अपर जिलाधिकारी वित्त/राजस्व अजीत कुमार सिंह द्वारा निर्देश दिए कि सभी प्रतिष्ठानों में ओवरलोडिंग, जर्जर विद्युत तारों, शॉर्ट सर्किट की संभावनाओं एवं विद्युत उपकरणों की नियमित जांच सुनिश्चित किया जाएगा। विद्युत सुरक्षा मानकों के अनुरूप वायरिंग, अर्थिंग, एमसीबी एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जाए तथा समय-समय पर विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। सार्वजनिक भवनों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष विद्युत सुरक्षा अभियान भी संचालित किया जाएगा। बैठक के दौरान विभिन्न संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के स्वामियों एवं प्रबंधकों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित करते हुए अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, फायर एनओसी, मॉक ड्रिल तथा आपदा प्रबंधन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उपस्थित प्रतिभागियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के संबंध में अपने सुझाव एवं अनुभव भी साझा किए गए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी, जिला आपदा विशेषज्ञ, उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा विभिन्न अग्नि सुरक्षा, सुरक्षा मानकों, आपदा प्रबंधन, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तथा विभागीय अपेक्षाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी सुझावों का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही एवं समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। बैठक में एडीसीपी ग्रेटर नोएडा संतोष कुमार, उप जिलाधिकारी सदर अनुज नेहरा, उप जिलाधिकारी दादरी आशुतोष गुप्ता, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे, जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी, मनोरंजन कर अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, विकास प्राधिकरणों के प्रतिनिधि, अग्निशमन विभाग, पुलिस प्रशासन, आपदा विभाग स्वास्थ्य विभाग, विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारी तथा जनपद के विभिन्न संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के स्वामी एवं प्रबंधक उपस्थित रहे। सौजन्य सूचना विभाग गौतमबुद्धनगर।