Popular Posts

अमेरिका-सऊदी रिश्तों में दरार? ईरान सीजफायर डील को लेकर बढ़ा तनाव

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अब अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में भी खटास की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान के साथ संभावित सीजफायर और शांति समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman के बीच मतभेद बढ़ते दिखाई दे रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप मध्य पूर्व में एक बड़े “Peace Deal” और Abraham Accords को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सऊदी अरब फिलहाल इस मुद्दे पर पूरी तरह सहमत नजर नहीं आ रहा।

ट्रंप क्या चाहते हैं?

बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ ऐसा समझौता चाहता है जिससे:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा पूरी तरह खुल सके
  • क्षेत्र में युद्धविराम लागू रहे
  • ईरान का परमाणु कार्यक्रम सीमित किया जा सके
  • और अरब देशों को Israel के साथ Abraham Accords में शामिल किया जा सके।

लेकिन यही मुद्दा अब सऊदी अरब और अमेरिका के बीच तनाव की वजह बनता दिख रहा है।

सऊदी अरब क्यों नाराज बताया जा रहा?

रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सऊदी अरब फिलहाल Israel के साथ खुलकर संबंध सामान्य करने को लेकर जल्दबाजी में नहीं है। खासकर गाजा युद्ध और फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर सऊदी नेतृत्व पर घरेलू और क्षेत्रीय दबाव बना हुआ है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि मोहम्मद बिन सलमान ने पहले ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दबाव बनाया था, लेकिन अब लंबा युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बनता जा रहा है।

ईरान युद्ध ने बढ़ाई चिंता

ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की कोशिशें लगातार जारी हैं, लेकिन हालात अभी भी बेहद नाजुक बने हुए हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी हमलों, लेबनान में संघर्ष और होर्मुज क्षेत्र में तनाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

उधर कई अरब देशों — जिनमें सऊदी अरब, UAE और कतर शामिल बताए जा रहे हैं — ने अमेरिका से कहा है कि ईरान के खिलाफ और बड़े सैन्य हमलों से बचा जाए और बातचीत को ज्यादा समय दिया जाए।

क्या मध्य पूर्व में बदल रहा है समीकरण?

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह सिर्फ अमेरिका-ईरान तनाव नहीं, बल्कि पूरे Middle East की नई geopolitical reshaping का संकेत है।

एक तरफ ट्रंप बड़ा क्षेत्रीय समझौता चाहते हैं, वहीं सऊदी अरब फिलहाल अपने रणनीतिक और धार्मिक संतुलन को ध्यान में रखकर कदम बढ़ा रहा है।

अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान के साथ कोई स्थायी शांति समझौता हो पाएगा या Middle East एक बार फिर बड़े टकराव की तरफ बढ़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *