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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz की नाकाबंदी के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत ने अप्रैल महीने में UAE और सऊदी अरब से कच्चे तेल की खरीद में बड़ा इजाफा किया है
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में सऊदी अरब से भारत का तेल आयात लगभग 704,000 बैरल प्रतिदिन रहा, जो मार्च की तुलना में करीब 23% ज्यादा है। वहीं UAE से आयात में तो 191% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 591,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।
दूसरी ओर, भारत का रूसी तेल आयात घटा है। अप्रैल में यह करीब 1.56 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा, जो मार्च के मुकाबले लगभग 21% कम है। इसकी वजह रूस के एक प्रमुख टर्मिनल पर आई बाधा बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब होर्मुज स्ट्रेट बंद है, तब तेल भारत तक कैसे पहुंचा?
दरअसल, सऊदी अरब और UAE ने वैकल्पिक पाइपलाइन और बंदरगाहों का इस्तेमाल किया, जैसे सऊदी का यानबू पोर्ट और UAE का फुजैराह पोर्ट, जो होर्मुज को बाईपास करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
भारत ने इस संकट के बीच ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए ईरान, वेनेजुएला, ब्राजील और नाइजीरिया जैसे देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है। साथ ही, कई साल बाद ईरान से फिर से तेल खरीद शुरू की गई है।
हालांकि, कुल मिलाकर भारत का कुल कच्चे तेल का आयात अप्रैल में घटकर लगभग 4.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है, जो पिछले महीने से थोड़ा कम है।
होर्मुज संकट के बीच भारत ने दिखा दिया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विकल्प तलाशने में सक्षम है। UAE और सऊदी के साथ मजबूत साझेदारी और नए रूट्स के जरिए भारत ने सप्लाई चेन को बनाए रखा है, जो भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम संकेत है।