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नई दिल्ली। देश में NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 जून को होने वाली नीति आयोग (NITI Aayog) की गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ शिक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार हाल के महीनों में सामने आए परीक्षा विवादों, विशेषकर NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक बदलावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार का फोकस परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही तय करने और तकनीक आधारित व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर है।
11 जून को होने वाली नीति आयोग की बैठक में शिक्षा सुधार एक अहम एजेंडा हो सकता है। बैठक में राज्यों से सुझाव लेने के साथ-साथ प्रवेश परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल केंद्र स्तर पर नहीं बल्कि राज्यों के सहयोग से ही प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकते हैं। इसी कारण मुख्यमंत्रियों के साथ व्यापक चर्चा की तैयारी की गई है।
NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दी गई थी, जिसके चलते लाखों छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखने को मिली। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग उठी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस योजना प्रस्तुत करने को कहा है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं NEET मामले और परीक्षा सुधार प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि प्रवेश परीक्षाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ाया जाएगा और परीक्षा संचालन तंत्र को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, डिजिटल निगरानी और जवाबदेही तंत्र को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधारों को लेकर होने वाली नीति आयोग की बैठक पर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं।