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पंजाब की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के तुरंत बाद पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली गई। भगवंत मान सरकार के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और इसे सियासी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरभजन सिंह ने हाल ही में AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा था। इसके तुरंत बाद पंजाब पुलिस ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली। पहले उनके साथ 9-10 पुलिसकर्मियों की तैनाती थी, जिसे अचानक हटा लिया गया।
हालांकि, सुरक्षा हटने के कुछ ही समय बाद केंद्र सरकार ने उन्हें केंद्रीय सुरक्षा मुहैया करवा दी। उनके आवास के बाहर CRPF के जवान तैनात नजर आए, जिससे साफ है कि सुरक्षा का जिम्मा अब केंद्र के हाथ में चला गया है।
यह पूरा मामला उस समय और ज्यादा चर्चा में आ गया जब AAP छोड़ने वाले अन्य नेताओं के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किए। कुछ जगहों पर नेताओं के घरों के बाहर नारेबाजी और दीवारों पर “गद्दार” लिखे जाने की खबरें भी सामने आईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश भी छिपा हो सकता है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और सरकार के बीच बढ़ती दूरी अब खुलकर सामने आ रही है।