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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सरकार के नए ‘3Fs’ फॉर्मूले का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकट के दौरान सरकार का फोकस Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) पर है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत जैसे बड़े आयातक देश पर वैश्विक तेल संकट का सीधा असर पड़ता है। खासकर होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर भी पड़ता है। सरकार कोशिश कर रही है कि आम जनता पर कम से कम बोझ पड़े।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की उस अपील का भी समर्थन किया, जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने और गैर-जरूरी आयात कम करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार सोने जैसे गैर-जरूरी आयातों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
निर्मला सीतारमण ने MSME सेक्टर की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने सभी सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिया कि वे छोटे और मध्यम उद्योगों का भुगतान 45 दिनों के भीतर करें। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल अटका हुआ है, जिससे छोटे उद्योगों की लिक्विडिटी प्रभावित हो रही है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और घबराहट फैलाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है और बाहरी आर्थिक दबावों को संभालने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बढ़ती ईंधन कीमतों के चलते एक्साइज ड्यूटी में कटौती की वजह से सरकार को वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।