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गौतमबुद्धनगर 13 अगस्त, 2026
पेरेंट्स एसोसिएशन से प्राप्त सुझावों एवं शिकायतों द्वारा अवगत कराया गया है कि अनेक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के माध्यम से शिक्षण कार्य के दौरान छात्र-छात्राओं के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विशेष रूप से प्री-लोडेड स्मार्ट बोर्ड/डिजिटल बोर्ड पर पाठ्य-पुस्तकों (Text Book) को सीधे प्रदर्शित कर शिक्षण कार्य कराया जाना तथा कक्षा-कार्य, प्रश्नोत्तर एवं गृहकार्य आदि के लिए भी डिजिटल स्क्रीन का लगातार उपयोग किया जाना संज्ञान में आया है। जिसका परिणाम स्वरूप प्रति दिवस प्रति छात्र स्क्रीन टाइम चार से 5 घंटे हो जा रहा है।

इससे विद्यार्थियों की आंखों में थकान, निकट दृष्टि ,सिरदर्द, एकाग्रता में कमी तथा अन्य शारीरिक एवं व्यवहारगत समस्याओं की संभावना बढ़ सकती है।

शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य एवं सर्वांगीण विकास के दृष्टिगत विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड एवं डिजिटल बोर्ड के सीमित, संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण उपयोग के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि स्मार्ट एवं डिजिटल बोर्ड शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने का सहायक माध्यम हैं, लेकिन इनका लगातार एवं अनावश्यक उपयोग विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, अध्ययन, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों को प्रभावित नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से पाठ्य-पुस्तकों को लगातार डिजिटल स्क्रीन पर प्रदर्शित कर पढ़ाने के स्थान पर संवादात्मक एवं सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धति अपनाने पर जोर दिया गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स तथा एनसीईआरटी(अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संस्थानों) द्वारा जारी गाइडलाइंस के अन्तर्गत आयु के अनुसार स्क्रीन उपयोग को सीमित एवं संतुलित किया जाए। प्राथमिक कक्षाओं में स्क्रीन टाइम को न्यूनतम रखते हुए 30 मिनट से अधिक न करने तथा उच्च प्राथमिक कक्षाओं में 60 मिनट से अधिक स्क्रीन उपयोग न होने देने पर विशेष बल दिया गया है। ऑनलाइन कक्षाओं में एनसीईआरटी की प्रज्ञाता गाइडलाइंस के अनुसार निर्धारित अवधि, सत्रों के बीच पर्याप्त विश्राम तथा 20-20-20 अभ्यास का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है, जिसमें हर 20 मिनट के स्क्रीन उपयोग के बाद 20 फीट दूर रखी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखना।
जिलाधिकारी ने सम्बंधित विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड का उपयोग मुख्यतः कठिन अवधारणाओं, चित्रों, वीडियो एवं आवश्यक शिक्षण सामग्री के प्रदर्शन के लिए सहायक माध्यम के रूप में किया जाए। लेखन, अभ्यास, प्रश्नोत्तर एवं विद्यार्थियों की सहभागिता वाली गतिविधियों के लिए ब्लैक बोर्ड, व्हाइट बोर्ड अथवा ग्रीन बोर्ड का नियमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। डिजिटल बोर्ड की स्क्रीन की चमक एवं प्रकाश व्यवस्था कक्षा के वातावरण के अनुरूप रखी जाए तथा विद्यार्थियों को स्क्रीन से उचित दूरी पर बैठाया जाए। लगभग 20 मिनट के स्क्रीन उपयोग के बाद आंखों को आराम देने के लिए अंतराल देने, गतिविधि आधारित शिक्षण, पठन-पाठन, लेखन, खेलकूद, समूह गतिविधियों एवं शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों की आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देने अथवा अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लक्षण मिलने पर अभिभावकों को तत्काल सूचित करने तथा आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय परामर्श लेने को कहा गया है। विद्यार्थियों की आंखों की त्रैमासिक जांच कराकर रिपोर्ट अभिभावकों से साझा करने पर भी जोर दिया गया है।

जिलाधिकारी ने सभी विद्यालय प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया है कि विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक आयोजित कर स्मार्ट एवं डिजिटल बोर्ड के संतुलित उपयोग तथा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों पर चर्चा की जाए और बैठक का कार्यवृत्त अभिभावक-अध्यापक बैठक में अभिभावकों के साथ साझा किया जाए। विद्यालयों को आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार डिजिटल-मुक्त अवधि, डिजिटल जीरो डे एवं डिजिटल डिटॉक्स जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को स्क्रीन से इतर खेल, रचनात्मक कार्य, पठन-पाठन एवं सामाजिक सहभागिता के पर्याप्त अवसर मिल सकें। नामित मजिस्ट्रेट/नोडल अधिकारियों को आवंटित विद्यालयों में इन निर्देशों के अनुपालन का अनुश्रवण करने तथा विद्यालय प्रबंध समिति की बैठक के कार्यवृत्त एवं अनुपालन आख्या निर्धारित अवधि में जिला विद्यालय निरीक्षक, गौतमबुद्धनगर के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।